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सुहागिन महिला ने खुद के पति को आजीवन कि सजा सुनाई , खुद अन्न जल का त्याग कर, किया एक दिवसीय अनसन जानिए क्या है पूरा मामला

DEVRAJ DEEPAK
By DEVRAJ DEEPAK  - EDITOR IN CHIEF
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बरमकेला / सारंगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक मे आज वट सावित्री ब्रत कि धूम देखने को मिला, महिलाओ ने सुबह से ही सावित्री व्रत कि तैयारी मे जुटी हुई थी महिलाए आज दुल्हन कि तरह सज धज कर पति कि लम्बी आयु के लिए निर्जला व्रत रखकर ईश्वर से कामना किए जिससे आज महिलाए पति को हमेशा दीर्घायु रहने को लेकर ना ही जल ग्रहण किया और नाही अन्न, पूजा समाप्ति के दौरान पति पूजा हुआ फिर पति ने पत्नियों को फलाश के दोना से जल ग्रहण कराया तभी व्रत टुटा और महिलाओ मे आज पतिव्रता होने कि परिचय देते हुए पतियों को एहसास भी कराया कि पत्नी पति के लिए क्या नहीं कर सकती, आज महिलाए पत्नी धर्म निभा कर बहुत उत्साहित हैं,

आज बरमकेला के विभिन्न ग्राम पंचायत खैरगढ़ी, बड़े नावापारा, सभी गाँवो मे बरगद पेड़ के नीचे महिलाए एकत्रित होकर बरगद पेड़ मे कच्चा धागा लपेट कर पति कि लम्बी आयु का कामना किए आज ख़ासकर पति और पत्नियों मे खासा उत्साह का दिन है आज के दिन पति पत्नियों के बीच हुए अनबन को भुलाकर एक डोर मे बंधने का अवसर प्राप्त हुआ आज का पर्व सावित्री और सत्यवान कि सच्चाई पर आधारित है जिससे आज सभी सुहागिन महिला सावित्री के रूप मे हैं और पति सत्यवान, लेकिन आज इस पर्व से यह प्रेरणा मिलता है कि पत्नी पतियों पर निर्जला रहकर पति कि सुखमय जिंदगी पर कठोर तपस्या कर अन्न जल तक त्याग सकते हैं तो आज के दिन पतियों को पत्नियों के लिए अपना एक बुराई त्याग कर पत्नियों को समर्पित करना चाहिए ताकि महिलाओ कि विस्वास और पति पत्नी कि अटूट प्यार बनी रहे, आप सभी जानते हैं आज का पर्व किस पर आधारित है लेकिन वास्तविक दृष्टि से सत युग से लेकर आज भी महिलाए माता बहने वैसे ही पति धर्म को निभाते आ रहे है जैसे कि सावित्री ने सत्यवान पर समर्पित थी, इसलिए कहा जाता है नारी है तो कल है, नारी का सम्मान करो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ इसी नारा का सभी सम्मान करते हुए अमल करें।

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