सारंगढ़ / सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में बिहान योजना के नाम पर करोड़ों की योजनाएँ चल रही हैं ताकि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। पर अब इसी योजना में गड़बड़ी की गंध आने लगी है। मामला जिले के उत्पादक समूह (पीजी ग्रुप) से जुड़ा है, सूत्रों के अनुसार जहाँ करीब सात महीने पहले धन्वंतरि उत्पादक समूह बुदेली के अध्यक्ष और सचिव ने मनमानी कर रायगढ़ के किसी वेंडर के नाम पर 50 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए और करीब सात महीने बीत ने के बाद भी सामान नहीं खरीदी करने से महिला सदस्यों के बोलने पर पत्रकारों ने जानकारी लिया, जानकारी के दौरान महिला सदस्यों के सामने पत्रकारों को बोला गया वो कौन है, उसे जानकारी देंगे, वो कौन होता है पूछने वाला, अब ताव से बोलने वालों पर आरोप सिद्ध होता है या जाँच मे इन्हे क्लीन चिट मिलता है, देखते हैँ दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, पीजी ग्रुप ट्रांसफर का पहले तो किसी को भनक तक नहीं लगी, लेकिन अब जब कुछ ग्रामीण महिलाओं ने इस पर सवाल उठाए, तो पूरा मामला सतह पर आ गया। बुदेली क्लस्टर के कुछ सदस्यों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,“हमें इस पैसे की कोई जानकारी नहीं दी गई थी। हमारे बिना बैठक बुलाए और प्रस्ताव पास किए बिना ही पैसे निकाल लिए गए। बाद में जब हमने पूछताछ की तो हमें टाल दिया गया।” कुछ महिला सदस्य फोन करके पूछे कि पीजी का पैसा ट्रांसफर हुआ है क्या, तो जबाब क्या मिला सुनिए तुम कौन हो? पीड़ित महिला जबाब दी मै उत्पादक समूह का सदस्य हूँ मुझे पूछ रहे थे पत्रकार लोग क्या बताऊ फिर जबाब मिलता है पत्रकार कौन है हम नहीं जानते, आप सोच सकते हैं, पीजी ग्रुप के सदस्यों को नहीं जानकारी दिया जाता है तो ये महाशया किनको बताएंगे इन लोगो को लगता है मायके से लाई गई सम्पति है, हमारे बिहान के दीदीयो के सभी का हक है सभी को सही जानकारी मिले शासन के राशि का सदुपयोग भी हो, किसी एक के लिए राशि नहीं दिया गया है !अब इस खुलासे से यह साफ हो गया कि रकम का उपयोग योजना के नियमों के अनुरूप नहीं हुआ है। सात महीने तक किसी को भनक न लगना और अचानक खबर प्रकाशित होने के बाद सस्ते दामों पर सामग्री खरीदकर वितरण करने की जल्दबाजी यह दर्शाती है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी को छिपाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, “जब हमने पूछा कि आखिर 50 हजार रुपए से क्या खरीदा गया और किन दुकानों से खरीदारी हुई, तो कोई भी साफ जवाब नहीं मिला।” वहीं कुछ सदस्यों ने बताया कि पैसे के इस्तेमाल का कोई लेखा-जोखा समूह की बैठक में नहीं दिया गया।अब मामला गंभीर होता देख जिला पंचायत सीईओ इंद्रजीत बर्मन ने इस पर तुरंत संज्ञान लिया है और बरमकेला, सारंगढ़ तथा बिलाईगढ़ जनपद सीईओ से जांच रिपोर्ट तलब की है। बर्मन ने साफ कहा है कि “यदि राशि बिना समूह की अनुमति के निकाली गई है, तो यह स्पष्ट रूप से अनियमितता और गबन की श्रेणी में आएगा, जिसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी।” प्रशासनिक हलकों में अब यह चर्चा गर्म है कि आखिर ऐसे मामलों में निगरानी तंत्र कहाँ चूक गया। बिहान योजना का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना था, पर जब उन्हीं के नाम पर कुछ लोग निजी फायदा उठाने लगें, तो यह योजना के मकसद को ही कमजोर करता है। सूत्रों की माने तो जांच रिपोर्ट आने के बाद कई नामों का खुलासा हो सकता है, जिन्होंने मिलकर समूह की राशि का दुरुपयोग किया। वहीं, जिला प्रशासन के सख्त रुख से अब अन्य समूहों में भी हलचल है, क्योंकि यह मामला पूरे जिले के बिहान ढांचे पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि केवल जांच रिपोर्ट से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिम्मेदारों पर एफआईआर दर्ज कर राशि की वसूली की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी बिहान योजना के नाम पर गरीब महिलाओं की मेहनत का पैसा हजम न कर सके। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं — देखना यह होगा कि क्या वाकई यह मामला केवल “कागजी जांच” बनकर रह जाता है या फिर बिहान घोटाले की सच्चाई उजागर होकर दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है।
