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गौरडीह पंचायत में 15वें वित्त का फर्जी बिल का खेल, नियमों कि अनदेखी अंधेर नगरी चौपट राजा जैसी स्तिथि

DEVRAJ DEEPAK
By DEVRAJ DEEPAK  - EDITOR IN CHIEF
3 Min Read

 

बरमकेला / बरमकेला जनपद क्षेत्र की गौरडीह ग्राम पंचायत में 15वें वित्त  राशि के आहरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सरपंच और सचिव की मिलीभगत से राशि का फर्जी आहरण किया गया और बिल मनोरंजन भोई और दिव्या सेल्स में लगाया गया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि नियमों के अनुसार किसी भी कार्य के लिए राशि आहरित करने से पहले सीईओ की अनुमति, कार्य की फोटो रिपोर्ट और सीईओ के निरीक्षण अनिवार्य है। इसके बाद ही ऑपरेटर द्वारा डिजिटल सिग्नेचर (डीएससी) के माध्यम से राशि का भुगतान किया जाना चाहिए।

लेकिन गौरडीह पंचायत में इन सभी प्रक्रियाओं की अवहेलना की गई और राशि मनमाने ढंग से आहरित कर दी गई। सूत्रों का कहना है कि इस खेल ने भ्रष्टाचार को खुला अवसर प्रदान कर दिया है। कई ग्राम पंचायतों में यह स्थिति “अंधेर नगरी, चौपट राजा” जैसी बन गई है, जहां नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं और किसी भी तरह की निगरानी नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सीईओ की निगरानी और डीएससी प्रक्रिया का सही पालन होता, तो इस तरह की अनियमितताओं पर तुरंत रोक लगाई जा सकती थी। इसके बावजूद, गौरडीह पंचायत में नियमों की पूरी तरह धज्जियाँ उड़ाई गई हैं।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन और सीईओ से सवाल किया है कि इस गंभीर मामले का संज्ञान कब लिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी। उनका कहना है कि जनता के वित्तीय हितों की सुरक्षा और सरकारी राशि का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए तत्काल जांच और जवाबदेही आवश्यक है। सूत्रों के अनुसार, सरपंच और सचिव ने बिना किसी प्रस्ताव के, बिना सीईओ की अनुमति और बिना निरीक्षण के फर्जी बिल बनाकर राशि आहरित कर दी। मनोरंजन भोई और दिव्या सेल्स के बिलों में फर्जीलेख दिखाए गए हैं, जो नियमों का उल्लंघन है।

अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है और दोषियों को दंडित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही प्रक्रिया का पालन करने और निगरानी मजबूत करने से इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। गौरडीह पंचायत की यह घटना केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के लिए चेतावनी है। अगर नियमों की अनदेखी जारी रही, तो जनता का वित्तीय हित लगातार जोखिम में रहेगा। इसलिए प्रशासन और सीईओ की जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। अब गौरडीह पंचायत मे फर्जी आहरण राशि कि शिकायत जनपद स्तर मे हो चूका है!

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