
बरमकेला। नगर पंचायत बरमकेला इन दिनों लगातार हो रही आगजनी की घटनाओं से दहशत में है। बीते कुछ महीनों में कई जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें दुकानों, घरों और गोदामों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हर घटना के बाद एक ही सवाल उठता है—आखिर कब तक बिना फायर ब्रिगेड के सहारे जूझता रहेगा बरमकेला?
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आग लगने के बाद राहत और बचाव के लिए लोगों को दूसरे शहरों से दमकल वाहन का इंतजार करना पड़ता है। इस देरी के चलते आग विकराल रूप ले लेती है और नुकसान कई गुना बढ़ जाता है। कई मामलों में स्थानीय लोगों ने खुद पानी और संसाधनों के सहारे आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण स्थिति पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है।
नगरवासियों का कहना है कि अगर समय पर दमकल वाहन उपलब्ध होता, तो कई बड़ी घटनाओं को रोका जा सकता था। अब यही पीड़ा जनआक्रोश में बदलती नजर आ रही है। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने एकजुट होकर फायर ब्रिगेड वाहन की मांग को लेकर आवाज बुलंद कर दी है।
अध्यक्ष प्रतिनिधि मनोहर नायक
अध्यक्ष प्रतिनिधि मनोहर नायक ने कहा कि “नगर में लगातार हो रही आगजनी की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। कई परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। हमने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों तक बात पहुंचाई है। बरमकेला में फायर ब्रिगेड की सुविधा जल्द से जल्द उपलब्ध कराई जाए, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो हम जनहित में बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।”
स्थानीय नागरिक बंटी साहू ने कहा
स्थानीय निवासी बंटी साहू ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “बरमकेला में बार-बार आग लगने की घटनाएं हो रही हैं, लेकिन आज तक यहां फायर ब्रिगेड की कोई व्यवस्था नहीं है। हर बार हमें दूसरे जगह से गाड़ी आने का इंतजार करना पड़ता है, तब तक सब कुछ जलकर खाक हो जाता है। आखिर कब तक आम जनता यूं ही नुकसान झेलती रहेगी? प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेकर यहां स्थायी रूप से दमकल वाहन की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि समय पर आग पर काबू पाया जा सके और लोगों की जान-माल की सुरक्षा हो सके।”
अब देखना यह है कि प्रशासन इस बढ़ते जनआक्रोश को कितनी गंभीरता से लेता है और बरमकेला को कब तक फायर ब्रिगेड जैसी बुनियादी सुविधा मिल पाती है। फिलहाल, हर आगजनी की घटना के साथ जनता का धैर्य जवाब देता जा रहा है और मांग अब आंदोलन का रूप लेती जा रही है।
