बरमकेला / जनपद पंचायत बरमकेला अंतर्गत ग्राम पंचायत मारोदरहा में संचालित उचित मूल्य दुकान में लंबे समय से गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही थीं। ग्रामीणों ने लगातार यह आरोप लगाया कि दुकान संचालक द्वारा न तो समय पर राशन वितरण किया जा रहा है और न ही सही मात्रा में अनाज दिया जा रहा है। कई बार तो हितग्राहियों को दुकान पर बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद राशन नहीं मिल पा रहा था। और मृत व्यक्ति का भी राशन गबन करने का आरोप था, इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए SDM सारंगढ़ ने जांच टीम गठित कर मामले की तहकीकात कराई। जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद शारदा महिला स्व-सहायता समूह मारोदरहा को गोबरसिंहा और मारोदरहा संचालन प्राधिकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। प्रशासन ने अस्थायी व्यवस्था के रूप में जय माँ चंद्रहासिनी महिला स्व-सहायता समूह सुखापाली को गोबरसिंहा उचित मूल्य दुकान का प्रभार आगामी आदेश तक सौंपा है। साथ ही मारोदरहा उचित मूल्य दुकान को गिरहुलपाली दुकान से संलग्न किया गया है,

ताकि ग्रामीणों को राशन वितरण में कोई बाधा न आए। लेकिन, निलंबन आदेश जारी होने के बावजूद शारदा स्व-सहायता समूह द्वारा सुखापाली समूह को अब तक प्रभार नहीं सौंपा गया है, जिसके चलते क्षेत्र के गरीब हितग्राहियों को राशन नहीं मिल पा रहा है। कई परिवार पिछले कई दिनों से राशन के इंतजार में हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पहले ही दुकान में मनमानी चल रही थी। अब जब प्रशासन ने कार्रवाई की, तो पुराने संचालक ने जानबूझकर नई समूह को प्रभार नहीं सौंपा है, जिससे लोगों को दिक्कत हो रही है।
ग्राम मारोदरहा निवासी ने बताया, “हम गरीब लोग हैं, महीने का राशन ही हमारा सहारा है। लेकिन पिछले कई दिनों से दुकान बंद है। बच्चे और बुजुर्ग भूखे हैं, हमें समझ नहीं आ रहा कि राशन कहां से लाएं।” इसी तरह गोबरसिंहा की महिला हितग्राही ने कहा, “सरकार कहती है कि सबको सस्ता राशन मिलेगा, लेकिन यहां महीनों से वितरण बंद है। प्रशासन जांच तो करता है, लेकिन व्यवस्था लागू करने में देर कर देता है।” ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्द ही नई समिति को प्रभार नहीं दिलवाया, तो वे जनपद मुख्यालय में प्रदर्शन करेंगे। लोगों की मांग है कि दोषी संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और राशन वितरण को तुरंत शुरू कराया जाए। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, SDM कार्यालय द्वारा संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि प्रभार हस्तांतरण की प्रक्रिया तत्काल पूर्ण की जाए ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि उचित मूल्य दुकानें गरीबों के अधिकार का साधन बनेंगी या कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया? ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक शिकायतें यूँ ही जारी रहेंगी।
