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चांटीपाली में महिला जागरूकता की अलख, जेंडर सखी संतोषी रात्रे और पीआरपी चमेली जांगड़े ने बदली सोच

DEVRAJ DEEPAK
By DEVRAJ DEEPAK  - EDITOR IN CHIEF
4 Min Read

बरमकेला
बरमकेला जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम चांटीपाली में महिलाओं को सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने के लिए एक प्रेरणादायी जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व जेंडर सखी संतोषी रात्रे एवं पीआरपी चमेली जांगड़े ने किया। कार्यक्रम में बिहान से जुड़ी महिला समूहों के साथ-साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं शामिल हुईं।

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को महिला उत्पीड़न, नशा मुक्ति, बाल विवाह की रोकथाम एवं सामाजिक भेदभाव जैसे गंभीर विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। जेंडर सखी संतोषी रात्रे ने महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों, घरेलू हिंसा से बचाव, पुलिस एवं प्रशासनिक सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया के बारे में सरल भाषा में समझाया। वहीं पीआरपी चमेली जांगड़े ने नशा मुक्ति के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस तरह नशा पूरे परिवार और समाज को खोखला कर देता है।

महिलाओं ने खुलकर साझा किया अपना दर्द

इस जागरूकता शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि महिलाओं ने खुलकर अपनी पीड़ा साझा की। कई महिलाओं ने घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, शराब से बिगड़ते परिवार, और बाल विवाह से जुड़ी समस्याओं को निर्भीक होकर सामने रखा। जेंडर सखी ने सभी महिलाओं को भरोसा दिलाया कि वे अकेली नहीं हैं, उनके साथ पूरा संगठन और प्रशासन खड़ा है।

बाल विवाह रोकने का लिया संकल्प

कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं को बाल विवाह के कानूनी अपराध होने की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि बाल विवाह से लड़कियों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है और उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। इस अवसर पर सभी महिलाओं ने अपने-अपने गांव में बाल विवाह रोकने के लिए सतर्क रहने और प्रशासन को सूचना देने का संकल्प लिया।

नशा मुक्ति को लेकर दिखा विशेष उत्साह

महिलाओं ने शराब और अन्य नशीली पदार्थों से होने वाली पारिवारिक समस्याओं को लेकर गहरी चिंता जताई। कई महिलाओं ने बताया कि नशे के कारण घर का माहौल बिगड़ जाता है, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और आर्थिक स्थिति भी कमजोर हो जाती है। इस पर जेंडर सखी और पीआरपी द्वारा नशा मुक्ति के लिए सामूहिक प्रयास करने, परिवार को समझाने और जरूरत पड़ने पर संबंधित विभाग से संपर्क करने की सलाह दी गई।

गांव-गांव जागरूक हो रहीं महिलाएं

कार्यक्रम के अंत में यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि अब गांव-गांव में महिलाएं जागरूक हो रही हैं। महिलाएं अपने अधिकारों को पहचानने लगी हैं और अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने का साहस जुटा रही हैं। इस जागरूकता अभियान से महिलाओं में आत्मविश्वास और नई ऊर्जा का संचार हुआ है।

कार्यक्रम से लौटीं महिलाएं नई सोच और संकल्प के साथ

जागरूकता कार्यक्रम के बाद महिलाओं ने कहा कि उन्हें बहुत कुछ नया सीखने को मिला है और अब वे चुप नहीं रहेंगी। वे न केवल खुद जागरूक रहेंगी बल्कि अन्य महिलाओं को भी जागरूक करेंगी। कार्यक्रम का समापन महिलाओं के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि वे महिला उत्पीड़न, नशा, बाल विवाह और भेदभाव के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करेंगी।

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