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गांव की धरती से गूँजी डिजिटल विकास की गाथा,राज्य सम्मान से निखरी छत्तीसगढ़ की बीसी सखियों की चमक

DEVRAJ DEEPAK
By DEVRAJ DEEPAK  - EDITOR IN CHIEF
4 Min Read

 

रायपुर। 24 नवंबर 2025।
छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बदलाव की असली शक्ति गांवों से निकलती है। न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय डिजिटल फाइनेंशियल वर्कशॉप में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान और CSC e-Governance के संयुक्त तत्वावधान में उत्कृष्ट कार्य कर रहीं बीसी सखियों को भव्य सम्मान प्रदान किया गया।

आज प्रदेश के दूरस्थ गांवों में भी लोग घर बैठे बैंकिंग सेवाएँ प्राप्त कर रहे हैं, डिजिटल भुगतान कर रहे हैं, सरकारी योजनाओं का लाभ सरलता से पा रहे हैं और इस परिवर्तन के केन्द्र में खड़ी हैं — हमारी बीसी सखियाँ। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल देने वाली इन नायिकाओं के कार्य को आज पूरे प्रदेश ने सलाम किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव रहे जिन्होंने चारों बीसी सखियों — जिला प्रतिनिधि रामफल, यशवती पटेल, शकुंतला साहू और प्रगिया पैंकरा — को राज्य स्तरीय सम्मान से अलंकृत कर उनके जज्बे की सराहना की।महिलाओं की शक्ति से मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था, मुख्य अतिथि ने कहा कि बिहान योजना (NRLM) के अंतर्गत वर्तमान में हजारों महिलाओं को स्वसहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ा गया है। इन समूहों के बीच बैंकिंग और वित्तीय सशक्तिकरण को सरल और सुगम बनाने का जिम्मा इन बीसी सखियों ने बखूबी निभाया है।


उन्होंने कहा—
“आज हर गांव में महिलाएँ आर्थिक गतिविधियों की धुरी बन रही हैं। बैंक मिटिंग से मोबाइल बैंकिंग तक, ऋण सुविधा से पेंशन भुगतान तक—हर कार्य में बीसी सखियाँ आत्मविश्वास और बदलाव का प्रतीक बन चुकी हैं।”

डिजिटल इंडिया का गांवों में नया चेहरा
कार्यक्रम के दौरान तकनीकी प्रशिक्षण, डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा, वित्तीय साक्षरता और ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारीगणों ने इसे ग्रामीण भारत की असली डिजिटल क्रांति बताया।बीसी सखियाँ न केवल बैंकों की सेवाएँ लोगों तक पहुँचाती हैं, बल्कि बचत की संस्कृति, दस्तावेज़ी प्रक्रिया, खाते खोलने और आर्थिक पारदर्शिता को भी बढ़ावा देती हैं।इन्होंने विशेष रूप से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में ऐसे परिवारों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा है, जो वर्षों से इस प्रणाली से दूर थे।

गर्व और प्रेरणा का क्षण – सम्मानित सखियों ने कहा कि यह सम्मान उन्हें आगे और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा। उनका लक्ष्य है कि गांव की हर महिला आर्थिक रूप से मजबूत बने और डिजिटल दुनिया में कोई भी ग्रामीण पीछे न रह जाए।कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों और विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट किया कि आने वाले समय में बीसी सखियों की भूमिका और अधिक व्यापक होगी। ग्रामीण आजीविका संवर्धन के हर मोर्चे पर वे नेताओं की तरह आगे बढ़ रही हैं।अंत में समारोह का समापन तालियों की गड़गड़ाहट और इस संदेश के साथ हुआ—“छत्तीसगढ़ की महिलाएँ अब सिर्फ परिवर्तन की हिस्सेदार नहीं, बल्कि परिवर्तन की निर्माता हैं… और बीसी सखियाँ इस नए युग की सबसे मजबूत पहचान हैं।”

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