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परिसीमन की दस्तक: बरमकेला या सरिया, किसे मिलेगा विधानसभा का ताज?

DEVRAJ DEEPAK
By DEVRAJ DEEPAK  - EDITOR IN CHIEF
4 Min Read

सियासत के गलियारों में गूंज रहा सबसे बड़ा सवाल… आखिर नई विधानसभा का ताज किसके सिर सजेगा—बरमकेला या सरिया?

सारंगढ़ / जैसे-जैसे परिसीमन की चर्चाएं तेज हो रही हैं, वैसे-वैसे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। हर चौक-चौराहे, हर गांव-गांव में अब बस एक ही चर्चा है—“नया विधानसभा क्षेत्र बरमकेला बनेगा या सरिया?”सन 2003 में क्षेत्र की राजनीतिक तस्वीर कुछ और थी। उस समय सरिया विधानसभा और सारंगढ़ लोकसभा हुआ करता था। लेकिन 2008 के परिसीमन ने पूरा नक्शा ही बदल दिया।सरिया विधानसभा और सारंगढ़ लोकसभा इतिहास बन गए, और क्षेत्र की जनता राजनीतिक पहचान के संकट से जूझने लगी।अब एक बार फिर परिसीमन की आहट सुनाई दे रही है… और जनता उम्मीद लगाए बैठी है कि इस बार क्षेत्र को उसका हक मिलेगा।

बरमकेला क्यों है मजबूत दावेदार?

अगर जमीनी हकीकत और प्रशासनिक व्यवस्था को देखा जाए तो बरमकेला सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरता है।बरमकेला आज ब्लॉक मुख्यालय है, और इसके अंतर्गत 96 ग्राम पंचायतें आती हैं। इनमें—64 ग्राम पंचायतें सारंगढ़ विधानसभा से जुड़ी हैं। और32 ग्राम पंचायतें रायगढ़ विधानसभा के अंतर्गत आती हैं।यानी बरमकेला क्षेत्र सीधे दो विधानसभा क्षेत्रों को प्रभावित करता है।इतना ही नहीं, बरमकेला में पहले से ही तमाम प्रशासनिक व्यवस्थाएं मौजूद हैं—तहसील कार्यालय,शिक्षा विभाग के कार्यालय
अन्य शासकीय विभाग जिससे जनता को हर छोटी-बड़ी सुविधा स्थानीय स्तर पर मिल रही है। क्षेत्रफल और भौगोलिक दृष्टि से भी मजबूत है बरमकेला अगर क्षेत्रफल और पहुंच की बात करें तो बरमकेला, डोंगरीपाली सहित आसपास के क्षेत्रों के लिए ज्यादा सुविधायुक्त और केंद्र बिंदु माना जाता है।बरमकेला अंतर्गत तीन प्रमुख थाना क्षेत्र आते हैं—बरमकेला थाना सरिया थाना,डोंगरीपाली थाना,यानी कानून व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण की दृष्टि से भी बरमकेला बेहद महत्वपूर्ण केंद्र है।
चुनाव के समय भी अक्सर देखा गया है कि सारंगढ़ विधानसभा का निर्णायक केंद्र बरमकेला ही बनता है।
जिस ओर बरमकेला का रुझान गया, उसी ओर चुनावी हवा बहती दिखी

सरिया भी क्यों है रेस में?

वहीं दूसरी ओर सरिया का भी अपना मजबूत राजनीतिक और ऐतिहासिक आधार है।सरिया कभी खुद एक विधानसभा क्षेत्र रह चुका है। इसलिए यहां की जनता आज भी अपने पुराने गौरव को वापस चाहती है।सरिया में भी सुविधाओं की कमी नहीं है—उप पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय 100 बिस्तर अस्पताल,व्यापारिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र सरिया क्षेत्र आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत माना जाता है। यही वजह है कि सरिया समर्थक भी मांग कर रहे हैं कि पुरानी पहचान लौटाई जाए और फिर से सरिया विधानसभा बनाई जाए। जनता की मांग—सुविधा के आधार पर हो फैसला अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि परिसीमन आयोग किस आधार पर फैसला करेगा?
क्या फैसला होगा—ऐतिहासिक पहचान के आधार पर?
यावर्तमान प्रशासनिक सुविधा और भौगोलिक संतुलन के आधार पर?अगर इतिहास देखा जाएगा तो सरिया भारी पड़ सकता है। अगर प्रशासनिक मजबूती, ग्राम पंचायतों की संख्या और भौगोलिक संतुलन देखा जाएगा तो बरमकेला का पलड़ा भारी नजर आता है। परिसीमन पर टिकी लाखों लोगों की उम्मीद क्षेत्र की जनता चाहती है कि इस बार ऐसा फैसला हो जिससे जनता को बेहतर प्रतिनिधित्व मिले, विकास की रफ्तार बढ़े और राजनीतिक पहचान मजबूत हो। अब सबकी नजरें परिसीमन आयोग और सरकार के अगले कदम पर टिकी है,क्या बरमकेला बनेगा नया विधानसभा?
या सरिया फिर से पाएगा अपना पुराना गौरव?
यह आने वाला समय तय करेगा…लेकिन इतना तय है कि इस बार का परिसीमन क्षेत्र की राजनीति में नया इतिहास लिख सकता है।

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